महिलाओं के यौन रोग :-स्तनों में पर्याप्त मात्रा में दूध की उपलब्धता (Mother's milk increaser)

स्तनों में पर्याप्त मात्रा में दूध की उपलब्धता (Mother's milk increaser)

परिचय

शिशुओं का सर्वोत्तम भोजन मां का दूध है। बच्चे को दूध प्रसन्न मुद्रा में पिलाना चाहिए। क्रोध में दूध पिलाने से बच्चे के पेट में दर्द और ऐंठन होने लगती है। शिशु जन्म के प्रथम तीन दिन तक मां का दूध बच्चों को नहीं पिलाना चाहिए। 

कारण

प्रसूता स्त्रियों में देखा गया है कि कुछ कमजोर कारणों से पर्याप्त मात्रा में दूध नहीं उतरता है जिसके कारण शरीर का कमजोर होना, दु:ख और चिंता का सताना तथा कलह का वातावरण होना स्त्रियों के छाती में दूध के कम होने के कारण होते हैं 

आयुर्वेद से इलाज

1. मुनक्का: 10-12 मुनक्के लेकर दूध में उबालकर प्रसूता स्त्री को प्रसव के बाद दिन में दो बार सेवन कराने से पर्याप्त लाभ मिलता है।

2. गाजर: गाजर का रस और भोजन के साथ कच्चे प्याज का सेवन भी मां का दूध बढ़ाने में सहायक होता है।

3. एरण्ड: मां के स्तनों पर एरण्ड के तेल की मालिश दिन में दो-तीन बार करने से स्तनों में पर्याप्त मात्रा में दूध की वृद्धि होती है।

4. प्याज: भोजन के साथ कच्चे प्याज का सेवन अधिक मात्रा में करने से माताओं के स्तनों में दूध में वृद्धि होती है। जब भी माताएं भोजन करें तो कच्चे प्याज का सेवन भोजन के साथ अवश्य करें।

5. मटर: मटर की फली खाने से स्त्रियों के दूध में वृद्धि होती है। मटर की कच्ची फलियां खाएं तथा मटर की सब्जी बनाकर खानी चाहिए।

6. उड़द: उड़द की दाल में घी मिलाकर खाने से स्त्रियों के स्तनों में पर्याप्त मात्रा में दूध की वृद्धि होती है। 

घरेलू इलाज

1. जीरा: सफेद जीरा, सौंफ तथा मिश्री तीनों का अलग-अलग चूर्ण बनाकर समान मात्रा में मिलाकर रख लें। इसे एक चम्मच की मात्रा में दूध के साथ दिन में तीन बार देने से प्रसूता स्त्री के दूध में अधिक वृद्धि होती है। लगभग 125 ग्राम जीरा सेंककर 125 ग्राम पिसी हुई मिश्री मिला लें। इसको 1 चम्मच भर रोज सुबह और शाम को सेवन करें। जिन माताओं को शिशुओं के लिए दूध की कमी हो, उनका दूध बढा़ने के यह बहुत ही लाभकारी है।

2. पपीता: यदि महिलाओं के शरीर में खून की कमी के कारण स्तनों में दूध की कमी हो जाए तो डाल का पका हुआ एक पपीता प्रतिदिन खाली पेट खाने लगातार बीस दिनों तक खिलाना चाहिए। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

3. अंगूर: अंगूर दुग्धवर्द्धक होता है। प्रसवकाल में यदि उचित मात्रा से अधिक रक्तस्राव हो तो अंगूर के रस का सेवन बहुत अधिक प्रभावशाली होता है। खून की कमी की शिकायत में अंगूर के ताजे रस का सेवन बहुत उपयोगी होता है क्योंकि यह शरीर के रक्त में रक्तकणों की वृद्धि करता है।

होमेओपेथी से इलाज

1. मैड्यूसा-  मैड्यूसा औषधि का स्त्री के स्तनों में दूध बढ़ाने वाली ग्रंथियों पर बहुत अच्छा असर पड़ता है। बच्चे के जन्म के समय जिन स्त्रियों के स्तनों में पहले दूध नहीं होता उसे दूसरे बच्चे के जन्म के समय मैड्यूसा औषधि की 3 शक्ति का सेवन कराया जाए तो उसके स्तनों में दूध बनने लगेगा।

2. अर्टिका-युरेन्स-  स्त्री के स्तनों में दूध ना आना, अपने आप ही स्तनों में सूजन आ जाना, स्तनों में से पतला स्राव का निकलते रहना आदि लक्षणों में रोगी स्त्री को अर्टिका-युरेन्स औषधि का मूल-अर्क देना लाभकारी रहता है।

3. एगनस-कैस्टस-  बच्चे को जन्म देने की शुरुआती अवस्था में स्त्री के स्तनों में दूध ना होने या किसी और परेशानी के कारण स्तनों में दूध की मात्रा कम हो जाने या सूख जाने पर एगनस-कैस्टस औषधि की 1 या 3 शक्ति का प्रयोग करना उचित रहता है।

4. डलकेमारा- स्त्री को ज्यादा ठंड लगने के कारण या आंधी-तूफान की वजह से स्तनों में दूध कम हो जाने पर डलकेमारा औषधि की 2 या 30 शक्ति देनी चाहिए।

5. कैमोमिला-  किसी तरह का दु:ख, सदमा, गुस्सा या चिड़चिड़ेपन के कारण स्त्री के स्तनों में दूध होते हुए भी बच्चे को पिलाते समय दूध ना निकलना जैसे लक्षणों में रोगी स्त्री को कैमोमिला औषधि की 30 शक्ति देने से लाभ मिलता है। 

नेचरोपैथी से इलाज
इस रोग से पीड़ित स्त्री को अपने स्तनों पर तथा पूरे शरीर पर लगभग 20 से 25 मिनट तक सूखी मालिश करनी चाहिए तथा इसके 10 मिनट बाद अपने शरीर की धूप से सिंकाई करनी चाहिए।इस रोग से पीड़ित स्त्री को यदि कब्ज की शिकायत हो तो उसे एनिमा क्रिया का प्रयोग करके अपने पेट को साफ करना चाहिए और कुछ देर तक व्यायाम करना चाहिए।इस रोग से पीड़ित स्त्री को ढीले वस्त्र पहनने चाहिए।इस रोग को ठीक करने के लिए स्त्री को प्रतिदिन मेहनस्नान या फिर कटिस्नान करना चाहिए तथा इसके अलावा सप्ताह में एक बार वाष्प स्नान करना चाहिए।

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