मासिक-धर्म में दर्द 1. तारपीन: कमर तक गुनगुने पानी में बैठे और पेडू (नाभि) पर सेक करने के बाद तारपीन के तेल की मालिश करने से मासिक-धर्म की पीड़ा नष्ट हो जाती है। 2. बबूल: लगभग 250 ग्राम ...
योनि को बड़ी करना परिचय: जिन महिलाओं की योनि (जननांग) बहुत छोटी होती है उसे सूचिवक्त्रा योनि कहते हैं। योनि के अधिक छोटी होने के कारण स्त्रियों को सहवास (मैथुन क्रिया) के समय ब...
योनि में जलन और खुजली का होना परिचय: इसमें योनि से पीला या काले रंग का बदबूदार स्राव होता है और साथ ही साथ खुजली व जलन होती है। कारण: पेशाब करने के बाद यदि स्त्री योनि को पानी से...
गुल्मवायु, हिस्टीरिया परिचय: यह रोग केवल महिलाओं में ही होता है। गुल्मवायु रोग में स्त्रियों को मिर्गी के समान ही दौरे आते हैं। जब हिस्टीरिया होता है, तो इसमें रोगी अचेत अव...
जरायु (गर्भाशय) के रोग परिचय: इसमें कई तरह के रोग होते हैं। जैसे गर्भाशय का मुंह बंद होना, ट्यूमर होना, गर्भाशय का ढीला होना, गर्भाशय का बाहर आ जाना और गर्भाशय से खून का अधिक मात...
कष्टार्त्तव (मासिक-धर्म का कष्ट से आना) परिचय: मासिक-धर्म यदि कष्ट के साथ स्रावित (निकलना) हो तो उसे कष्टरज (मासिक-धर्म का कष्ट से आना) कहते हैं। ऋतुस्राव (मासिक धर्म) में नवयुवत...
माहवारी का अधिक आना 1. लोध्र: 10 ग्राम पिसी हुई लौध्र में खांड 10 ग्राम की मात्रा में मिलाकर रख लें। इसे 2-2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी से सेवन करने से माहवारी के अधिक आने की सम...
मासिक - धर्म (माहवारी) न होने के कई कारण होते हैं जो निम्नलिखित है- प्रकृति के नियमानुसार 40-50 वर्ष की आयु की महिलाओं में हमेशा के लिए मासिक धर्म का आना बंद हो जाता है। महिलाओं के ...