प्रसव वेदना (LABOUR PAIN) परिचय : प्रसव के समय बच्चा और जच्चा दोनों के लिए ही जटिलता बराबर रूप से होती है और चिकित्सक के लिए तो वह परीक्षा की घड़ी ही होती है। क्योंकि एक साथ दोनों जानों की रक्षा करना चिकित्सा के ऊपर ही होता है। अगर थोड़ी सी भी भूल हुई तो परेशानी चारों ओर से घेर लेती है। इसलिए चिकित्सक को चाहिए कि धैर्य के साथ अपनी कुशलता का परिचय दें या अन्य कुशल चिकित्सक के हाथ में कार्यभार सौंप दें, अस्पताल पहुंचा दें। यदि आसपास में यह सुविधा उपलब्ध न हो तो सावधानी से काम लें। जब तक गर्भाशय का मुंह खुला नहीं है। किसी भी ऐसी औषधि या टोटके का प्रयोग नही करें जो गर्भाशय पर क्रियाशील हो। गर्भाशय का मुंह खुल चुका हो रक्त पानी भी आ चुका हो पर बच्चा बाहर नहीं निकल रहा हो तो कुछ प्रयोग करें। ऐसा मानना ही कि शिशु को जन्म देने के बाद मां का दूसरा जन्म होता है, क्योंकि शिशु को पैदा करने में स्त्री को बहुत कष्ट उठाने पड़ते हैं। परन्तु आज के युग में ऐसी बहुत-सी दवायें तथा विधियां प्रचलित हैं, जो प्रसव (डिलिवरी) के दर्द को कम कर देती हैं। भोजन तथा परहेज : प्रसव (डिलीवरी) काल के दौरान सुपाच्य य...